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बसंत

आज फिर बसंत के चटक फूल खिले है , हर रूप हर रंग में बहार रंगे है | कोमल सी पंखुड़ी भी मुस्कुरा रही है ,वहीं पेड़ की कोमल शाखा हरे रंग से नहा रही है | वहीं प्यार से कोयल भी गुनगुना रही है ,हवा संग जीवन के गीत गा रही है | कितना पावन सा है प्रक्रति का यह यौवन , फ़ाल्गुन के आगमन के बिगुल बजा रही है | आसमां भी चांदनी में इठला रहा है , चाँद भी बादलो की चिलमन से झांक रहा है | पवन संग मन का फ़रिश्ता मोर भी पंखों को फैला रहा है , हरितमा की ऐसी चादर ओढ़ धरा भी खुशियाँ मना रही है | कितना अतभुत सा है धरती का यह मंजर , हर तरफ गुलाब और गुलमोहर का गुलदस्ता सा नज़र आ रहा है | बहुत खूबसूरत है बसंत की हर पहर , कभी गुनगुनी धुप तोह कभी ठंडी सी हवा का संगम बना रहा है … पंख 🦋✍️😊.

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